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Top Sories
Author: Kishore Kumar
Spiritual journalist & Founding Editor of Ushakaal.com
स्मार्ट योग मैट के दौर में जीवंत फीडबैक की महत्ता
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर करोड़ों लोगों का एक साथ योगाभ्यास करना स्वागत योग्य कदम था। वैसे, अनेक योग संस्थानों की ओर से आम दिनों में भी जागरुकता के लिए योग शिविरों के आयोजन किए जाते हैं। ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य प्रेरणा देना और योग की विविधताओं से परिचय कराना होता है, न कि व्यक्तिगत साधना के लिए सूत्र देना होता है। इसलिए कि एक ही तरह की क्रियाएं सबके लिए समान रूप से कल्याणकारी नहीं हो सकती हैं। पर, देखा जाता है कि अनेक लोग सामूहिक आयोजनों या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के प्रदर्शनों के आधार पर जटिल आसन भी करने…
पश्चिम बंगाल की यौगिक चेतना का पुनर्जागरण
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर वैसे तो कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामरूप तक उत्सवी माहौल रहा, पर पहली बार कोलकाता महानगर सहित पूरे पश्चिम बंगाल का जैसा योगमय वातावरण रहा, वह अद्भुत था और उसके मायने बड़े गहरे हैं। एक संदेश जो मुख्य रूप से मुखरित हुआ, वह यह कि बंग भूमि के लोग अपने स्वर्णिम अतीत से जुड़कर बेहतर कल की ओर कदम बढ़ाने के लिए सजग और सतर्क हैं। लोगों में उत्साह का आलम यह था कि योग दिवस समारोह मुख्य सड़कों, पार्कों और विभिन्न शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं रह गया था, बल्कि नदी, नौका और…
स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए यौगिक नुस्खा
दीर्घायु होना मानव जीवन की सबसे बड़ी आकांक्षाओं में से एक है। नित नए अनुसंधान किए जा रहे हैं कि मानव जीवन को किस विधि से लंबा किया जाए। चीन के पेइचिंग विश्वविद्यालय और कुनमिंग विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के मुताबिक, यदि मानव कोशिकाओं के प्राकृतिक कचरा निपटान तंत्र यानी लाइसोसोम को सक्रिय कर दिया जाए, तो असमय बुढ़ापे पर लगाम लगाई जा सकती है। लाइसोसोम के सक्रिय होने से शरीर में जमा होने वाले प्रोजेरिन जैसे जहरीले प्रोटीन और हानिकारक तत्वों की सफाई हो जाती है। इससे कोशिकाएं स्वस्थ, सक्रिय और पुनः युवावस्था की ओर लौट आती…
योग की विविधता और प्रयोगधर्मिता की अनोखी दास्तान
गर्मियों के मौसम में फिटनेस जगत में एक नया चलन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और वह है – वाटर योगा या जल-योग। इसमें स्विमिंग पूल में कमर तक पानी में खड़े होकर योगासन किए जाते हैं। पानी शरीर का भार कम महसूस कराता है, जिससे जोड़ों और मांसपेशियों पर दबाव घटता है। यही कारण है कि इसे विशेष रूप से बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं, अधिक वज़न वाले लोगों और जोड़ों के दर्द से पीड़ित व्यक्तियों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।उत्तर प्रदेश में प्रयाग आरोग्यम् केंद्र के प्रमोटर व योगाचार्य प्रशांत शुक्ल की व्यक्तिगत पहल के कारण गर्मियों…
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग
वृद्धावस्था में मानव स्वस्थ रहे, यह 21वीं सदी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2050 तक दुनिया में 80 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों की संख्या में भारी इजाफा हो गया रहेगा। यह मानव सभ्यता की एक बड़ी उपलब्धि तो है, पर स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियाँ भी बड़ी हैं। उम्र बढ़ने के साथ हृदय रोग, मधुमेह, गठिया, अल्जाइमर, पार्किंसन, अवसाद और शारीरिक निर्बलता जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं। इसलिए, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मौजूदा दशक को स्वस्थ आयु-वृद्धि का दशक घोषित कर रखा है। चूंकि अब योग की वैज्ञानिकता भी साबित हो…
त्राटक : आंतरिक रूपांतरण के लिए ऋषियों का उपहार
आज पूरी दुनिया तनाव, मानसिक अशांति और दिशाहीनता की चुनौतियों से जूझ रही है। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, निरंतर आने वाली सूचनाओं की बाढ़ और गलाकाट प्रतिस्पर्धा के कारण मनुष्य का मन हर क्षण विचलित रहता है। इसी मानसिक चंचलता और भटकाव के कारण किसी एक विषय पर कुछ पलों से अधिक ध्यान केंद्रित रख पाना अत्यंत दुष्कर हो गया है। ऐसे अशांत समय में त्राटक जैसी प्राचीन यौगिक विधि केवल आध्यात्मिक साधकों के लिए ही नहीं, बल्कि सामान्य जनमानस के लिए भी एक संजीवनी की तरह उपयोगी है। योगियों का शाश्वत अनुभव है कि मन को जीतने का मार्ग…
पराजय की भावना को पराजित करें
कुरुक्षेत्र के मैदान में किसी बाह्य कारण से अर्जुन के हाथ से गांडीव नहीं फिसला था, बल्कि कारण मन में उपजा विषाद था। मौजूदा समय में छात्र-युवाओं की स्थिति भी कुछ वैसी ही है। प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, भविष्य की अनिश्चितता, प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं के कारण ऐसे हालात बने हैं। ऐसे में, मानसिक यंत्रणा और टूटते मन को सहारा देने के लिए किसी बाहरी दिलासे की नहीं, बल्कि एक ऐसे आंतरिक मार्गदर्शक की आवश्यकता है, जो हमारी मानसिक अवस्था को बदल दे।वैदिक शास्त्र की घोषणा है कि मनुष्य केवल हाड़-मांस का शरीर या भावनाओं का पुंज नहीं है। उसके…
पतित पावनी गंगा का आध्यात्मिक आख्यान
भागीरथी तपस्या और शिव की जटाओं से नियंत्रित होकर धरती पर उतरी गंगा महज एक नदी नहीं, बल्कि सनातन चेतना के अंतस में बहती जीवनदायिनी धारा है। यह भारतीय आध्यात्मिक यात्रा का दिव्य और जीवंत आख्यान है। जब महर्षि विश्वामित्र के साथ यज्ञ रक्षा के लिए वनगमन करते समय श्रीराम ने गंगा के दैवीय सौंदर्य को निहारा, तो उनके मन में कौतूहल और जिज्ञासाएं जाग्रत हुईं। उन जिज्ञासाओं के समाधान में महर्षि ने गंगा अवतरण का जो प्रसंग सुनाया, वह केवल एक ऐतिहासिक घटना का वृतांत भर नहीं था, बल्कि श्रीराम के भावी जीवन का एक आध्यात्मिक खाका भी था।…
संत मलूकदास : दास मलूका कह गए सबके दाता राम
संतों की जयंती मनाना केवल अतीत को याद करने जैसा नहीं, बल्कि वर्तमान को दिशा देना होता है। इसलिए, जब संतों के जीवन और उनके विचारों पर दृष्टि डालते हैं, तो स्पष्ट होता है कि उनकी शिक्षाएँ समय की सीमाओं से परे हैं। विज्ञान, तकनीक और सामाजिक संरचनाओं के क्षेत्र में हमने भले उल्लेखनीय प्रगति कर ली है। पर, खुद का रुपांतरण होना बाकी है। काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे आंतरिक शत्रु आज भी प्रबल हैं। ऐसे में संत मलूकदास की 452वीं जयंती पर जब देश-विदेश में उन्हें विविध रूपों में स्मरण किया गया, और उनकी शिक्षाएं नईपीढ़ी के…
गुरु की चेतना की छाया में सबका कल्याण करते श्रीश्री
वैदिक परंपरा में गुरु और शिष्य का संबंध बीज और वृक्ष की तरह होता है, जहाँ बीज अपनी पूरी सामर्थ्य वृक्ष में समाहित कर देता है। श्रीश्री रविशंकर का जीवन और उनकी आध्यात्मिक उपलब्धियों पर गौर करें तो कहना होगा कि महर्षि महेश योगी की चेतना की छाया श्रीश्री के व्यक्तित्व और उनके वैश्विक मिशन में एक आधारशिला की तरह विद्यमान है।महर्षि महेश योगी की सबसे बड़ी खूबी ‘निंदा का पूर्ण अभाव’ थी। वे साधारण व्यक्ति को भी ‘गवर्नर’ या ‘राजा’ कहकर उसकी गरिमा को जगाते थे। श्रीश्री के व्यवहार में यही छाया ‘अपनत्व’ और ‘मुस्कुराहट’ के रूप में दिखती…
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