Author: Kishore Kumar

Spiritual journalist & Founding Editor of Ushakaal.com

रामलीला के मंच पर जब श्रीराम वनगमन के लिए निकलते हैं तो दर्शकों की आँखें भर आती हैं। भरत-मिलाप होता है, तो हजारों कंठों से जयघोष फूट पड़ता है। रामराज्याभिषेक के समय श्रद्धालु हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं। आश्चर्य यह है कि इनमें से कोई भी प्रसंग उनके लिए नया नहीं होता। वे जानते हैं कि राम वन जाएँगे, सीता का हरण होगा, हनुमान समुद्र लाँघेंगे और रावण का अंत होगा। फिर भी हर वर्ष वही कथा उन्हें उसी तीव्रता से आंदोलित करती है। आखिर ऐसी कौन-सी शक्ति है, जिसके कारण एक चिर-परिचित कथा सदियों से जीवित है और…

Read More

श्रीदुर्गासप्तशती अथवा देवीमाहात्म्य शाक्त साधना-परंपरा का एक आधारभूत ग्रंथ है। इसके मंत्रों और श्लोकों में आदिशक्ति की वह गत्यात्मक चेतना प्रतिष्ठित है, जो मनुष्य की आसुरी प्रवृत्तियों का रूपांतरण कर उसके भीतर सुप्त दैवी शक्तियों को जागृत करती है। इस दृष्टि से नवरात्रि देवी की आराधना का पर्व तो है ही, आत्मशुद्धि, अंतर्जागरण और चेतना के उत्कर्ष का आध्यात्मिक अनुष्ठान भी है।भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में जगन्माता को समस्त सृष्टि की मूल शक्ति माना गया है। ऋग्वेद के देवीसूक्त में इसी विश्वव्यापी चेतना का उद्घोष है। शाक्त दृष्टि में यह वही आदिशक्ति है, जो समस्त चराचर जगत् में व्याप्त होकर सृष्टि…

Read More

हठयोग तन और मन के संतुलन की एक सुव्यवस्थित पद्धति है और इसका षट्कर्म योग साधना की आरंभिक सीढ़ियां हैं। इसलिए, घेरण्ड संहिता में शोधन क्रिया को योग-साधना का आधार माना गया है। धौति, बस्ति, नेति, नौलि, त्राटक और कपालभाति जैसी क्रियाएँ इसी शोधन का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य शरीर की बाह्य सफाई करके उसे इस तरह तैयार करना है कि श्वास और प्राण का प्रवाह सहज हो तथा उच्चतर योग-साधनाओं का मार्ग प्रशस्त हो सके। इस दृष्टिकोण से नेति क्रिया का विशिष्ट स्थान है। सर्दियों के दिनों में, जब नाक बंद होने, एलर्जी, जुकाम और साइनस संबंधी परेशानियाँ बढ़ने…

Read More

एक रोगी ऑपरेशन थिएटर में जाने से पहले आंखें बंद करता है। कुछ क्षण शांत बैठता है, धीमी श्वास लेता है और फिर गहरे, सहज स्वर में ‘ॐ’ का उच्चारण करता है। स्पेन के बार्सिलोना स्थित मुख्य अस्पताल का ऐसा दृश्य अब किसी को चौंकाता नहीं। रोमन कैथोलिक बहुल देश में शल्य-चिकित्सा से पहले श्वास-प्रश्वास के साथ मंत्रोच्चार की बात असामान्य लग सकती है। लेकिन उस अस्पताल को मरीजों का तनाव कम करने का मानो अचूक नुस्खा मिल चुका है। श्वास-प्रश्वास के साथ मंत्र साधना तन-मन को किस तरह प्रभावित करते हैं, इसके बारे में भारत के योगी सदियों से…

Read More

शांत मन से देखा गया सपना भविष्य का रोडमैप बन जाता है, और आत्मविश्वास उस दिशा में उठाया गया पहला कदम। श्रीमद्भगवद्गीता में इसी ओर संकेत किया गया है। जब ध्येय स्पष्ट हो, बुद्धि स्थिर हो और कर्म के प्रति निष्ठा हो, तब भविष्य की चिंता नहीं, वर्तमान का कर्म ही केंद्र में आ जाता है। ऐसे में “योगः कर्मसु कौशलम्” का अर्थ केवल ध्यान या आसन नहीं रह जाता। वह कर्म को विवेक, संतुलन और कुशलता के साथ करने की सीख बन जाता है।पर, श्रीमद्भगवद्गीता की कुशलता का मर्म फल की दौड़ में नहीं, फल के प्रति समता में…

Read More

कोई नया काम शुरू करना हो या यात्रा पर निकलना हो, मुख से अनायास निकल पड़ता है -“श्री गणेशाय नमः।” क्या यह केवल धार्मिक परंपरा है, या इसके पीछे जीवन और चेतना का कोई गहरा रहस्य भी छिपा है? गणेश चतुर्थी इसी गूढ़ार्थ को समझने का अवसर है।यह मंत्र ऐसा है, जिसे हम सोचकर नहीं, सहज भाव से बोलते हैं। कोई नया काम शुरू करना हो, किसी यात्रा पर निकलना हो, विवाह का शुभ मुहूर्त हो या साधना आरंभ करनी हो, मुख से अनायास निकल पड़ता है, “श्री गणेशाय नमः।” शास्त्रों के मुताबिक, गणेश प्रथम पूज्य हैं, इसलिए हर शुभ…

Read More

ऋषि-परंपरा भारत के अतीत की कोई जड़ स्मृति नहीं, बल्कि ज्ञान, सत्य, आत्मानुशासन और लोकमंगल की एक निरंतर प्रवाहित होती जीवन-दृष्टि है। यह परंपरा कभी मंत्र और दर्शन के माध्यम से, कभी कृषि और चिकित्सा जैसे व्यावहारिक विज्ञानों के अनुसंधान के माध्यम से, तो कभी गुरु-शिष्य, गोत्र, संन्यास और मठ-परंपराओं के रूप में जीवंत रही है। ऋषि पंचमी इसी महान ऋषि परंपरा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर है।भारतीय परंपरा में ऋषियों की महानता इस बात में निहित थी कि उन्होंने स्वयं को जानने, प्रकृति के गूढ़ नियमों को समझने के लिए महलों के ऐश्वर्य और क्षणभंगुर सांसारिक सुखों…

Read More

At Anandabodh Institute of Yoga, we believe Yoga Teacher Training should be much more than completing a syllabus and receiving a certificate. It should be a journey of deep learning, personal transformation and authentic teaching.✨ Classical Yoga & Philosophy✨ Yogic Lifestyle & Wellbeing✨ Teaching Methodology & Practical TeachingBut above all, our intention is to develop the understanding, clarity and confidence to share Yoga with others. Because knowing Yoga and teaching Yoga are not the same.🪷 LEARN → EXPERIENCE → UNDERSTAND → TEACHThe programme also provides a foundation for further professional development and prepares participants for the Yoga Certification Board (YCB)…

Read More

“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।”अर्थात्, तुम्हारा अधिकार कर्म करने में है, उसके परिणामों पर नहीं।समुद्र के क्षितिज को यदि कोई छूना चाहे, तो वह कभी संभव नहीं हो पाता। हम जितना आगे बढ़ते हैं, क्षितिज उतना ही आगे खिसक जाता है। हमारे जीवन की प्रकृति भी कुछ ऐसी ही है। हम लक्ष्यों को पूरा करने, जीवन को व्यवस्थित करने और भीतर-बाहर की अव्यवस्था को समेटने के लिए निरंतर दौड़ते रहते हैं। किंतु जैसे ही एक काम समाप्त होता है, दूसरा सामने खड़ा मिलता है। एक ज़िम्मेदारी पूरी होती है, तो अगली दस्तक दे देती है। जीवन में कभी ऐसा कोई अंतिम…

Read More

बीसवीं सदी के महान संत स्वामी शिवानंद सरस्वती ऋषिकेश में पतित पावनी गंगा के तट पर अवस्थित अपनी कुटिया में शिष्यों को दर्शन दे रहे थे। तभी एक अमेरिकी शिष्य और अपने जमाने के प्रख्यात दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक डॉ. थॉम्पसन ने सवाल पूछ लिया – “स्वामीजी, क्या आपने ईश्वर को देखा है?” शायद उत्तर में किसी अलौकिक दर्शन, समाधि के किसी अद्भुत अनुभव या किसी चमत्कारिक क्षण की अपेक्षा थी। लेकिन स्वामी जी के उत्तर से प्रश्न की दिशा ही बदल गई। उन्होंने कहा, “मैं ईश्वर के सिवा कुछ देखता ही नहीं। भोजन में, जल में, मिलने आए लोगों में…

Read More