Author: Kishore Kumar

Spiritual journalist & Founding Editor of Ushakaal.com

महर्षि वेदव्यास ने वेदों का वर्गीकरण करके उसे लिपिबद्ध करा दिया था, अठारह पुराणों की रचना पूरी की जा चुकी थी। स्वीकृति और यश की कोई कमी न थी। फिर भी सरस्वती नदी के पावन तट पर बैठे व्यास के मन में एक अजीब बेचैनी थी। तभी वहां देवर्षि नारद का पदार्पण होता है। वे उन्हें उस कमी का अहसास कराते हैं, जो उनकी निराशा का कारण बनी थी। वे संकेत करते हैं कि रचनाओं में भगवत्-तत्त्व और भगवान के निर्मल यश का वैसा गान नहीं हुआ, जैसा होना चाहिए था और जो दर्शन हृदय को तृप्त न करे, वह…

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मेरुदंड हमारे शरीर की संरचना का केंद्रीय अक्ष है, मुख्य आधार। मेरुदंड अस्वस्थ हो तो न शरीर सीधा खड़ा रह सकता है, न ही तंत्रिका तंत्र ठीक से कार्य कर सकता है, क्योंकि इसी स्तंभ के भीतर से वह मेरुरज्जु गुजरती है, जिस पर पूरे शरीर का तंत्रिका-संचार टिका है। पर रीढ़ का महत्व यहीं समाप्त नहीं होता। यौगिक और आध्यात्मिक परंपराओं में इसका अर्थ शरीर से आगे, गहन आध्यात्मिक तलों तक जाता है। ऋषियों का अनुभव है कि सीधी और सशक्त रीढ़ ही वह आधार है, जो साधक को अपने आंतरिक केंद्र और आत्म-जागरूकता से गहरा संबंध जोड़ने में…

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आषाढ़ शुक्ल द्वितीया यानी आगामी 16 जुलाई को महाप्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने रथों पर सवार होकर मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे और नवें दिन यानी 24 जुलाई को बाहुड़ा यात्रा के साथ लौट आएँगे। सामान्यतः देवता मंदिरों के गर्भगृह में प्रतिष्ठित होते हैं और भक्त वहाँ तक पहुँचते हैं। पर पुरी में हर साल भगवान अपने रत्नसिंहासन से उतरकर भक्तों के बीच सड़क पर आ जाते हैं। यह ईश्वर की लोक-सुलभता का अनुपम उदाहरण है। इसे केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, समानता और आध्यात्मिक समावेशन का सबसे बड़ा…

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भारतीय दर्शन में कहा गया है, “विद्यादानं महादानम्।” दूसरी ओर श्रीमद्भगवत गीता तथा चाणक्य नीति में पात्र व्यक्ति को विद्या देने पर जोर है। प्रथम दृष्टया तो इन बातों में विरोधाभास प्रतीत होता है। पर, वास्तव में वे एक दूसरे के पूरक हैं। भारतीय दर्शन का बारीकी से अध्ययन करें तो स्पष्ट संदेश मिलता है कि विद्या का दान अवश्य किया जाए, क्योंकि वह महादान है; परंतु ज्ञान किसी पर थोपा न जाए। इसलिए, कहा गया है कि जिज्ञासा जगाना शिक्षक का धर्म है, और जिज्ञासा जागने पर निस्संकोच ज्ञान देना भी उसका धर्म है। ऐसी विद्या का दान ही…

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पंडवानी की विश्वविख्यात गायिका, पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई सदा के लिए मौन हो गईं। वह स्मृति परंपरा की जीती-जागती मिसाल थीं। सन् 1987 में पद्मश्री, सन् 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, सन् 2003 में पद्म भूषण और सन् 2019 में पद्म विभूषण सम्मान मिलना इस बात का द्योतक है कि वह जिस परंपरा की संवाहक थीं, उसे कितना ऊंचा स्थान प्राप्त था। वह भारत की उस ज्ञान-परंपरा की सशक्त प्रतिनिधि थी, जिसे मनुष्य की स्मृति, वाणी और अनुभव को ज्ञान का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता रहा है। वे जीवन पर्यंत पंडवानी के माध्यम से महाभारत की कथाएँ…

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर करोड़ों लोगों का एक साथ योगाभ्यास करना स्वागत योग्य कदम था। वैसे,  अनेक योग संस्थानों की ओर से आम दिनों में भी जागरुकता के लिए योग शिविरों के आयोजन किए जाते हैं। ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य प्रेरणा देना और योग की विविधताओं से परिचय कराना होता है, न कि व्यक्तिगत साधना के लिए सूत्र देना होता है। इसलिए कि एक ही तरह की क्रियाएं सबके लिए समान रूप से कल्याणकारी नहीं हो सकती हैं। पर, देखा जाता है कि अनेक लोग सामूहिक आयोजनों या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के प्रदर्शनों के आधार पर जटिल आसन भी करने…

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर वैसे तो कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामरूप तक उत्सवी माहौल रहा, पर पहली बार कोलकाता महानगर सहित पूरे पश्चिम बंगाल का जैसा योगमय वातावरण रहा, वह अद्भुत था और उसके मायने बड़े गहरे हैं। एक संदेश जो मुख्य रूप से मुखरित हुआ, वह यह कि बंग भूमि के लोग अपने स्वर्णिम अतीत से जुड़कर बेहतर कल की ओर कदम बढ़ाने के लिए सजग और सतर्क हैं। लोगों में उत्साह का आलम यह था कि योग दिवस समारोह मुख्य सड़कों, पार्कों और विभिन्न शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं रह गया था, बल्कि नदी, नौका और…

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दीर्घायु होना मानव जीवन की सबसे बड़ी आकांक्षाओं में से एक है। नित नए अनुसंधान किए जा रहे हैं कि मानव जीवन को किस विधि से लंबा किया जाए। चीन के पेइचिंग विश्वविद्यालय और कुनमिंग विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के मुताबिक, यदि मानव कोशिकाओं के प्राकृतिक कचरा निपटान तंत्र यानी लाइसोसोम को सक्रिय कर दिया जाए, तो असमय बुढ़ापे पर लगाम लगाई जा सकती है। लाइसोसोम के सक्रिय होने से शरीर में जमा होने वाले प्रोजेरिन जैसे जहरीले प्रोटीन और हानिकारक तत्वों की सफाई हो जाती है। इससे कोशिकाएं स्वस्थ, सक्रिय और पुनः युवावस्था की ओर लौट आती…

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गर्मियों के मौसम में फिटनेस जगत में एक नया चलन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और वह है – वाटर योगा या जल-योग। इसमें स्विमिंग पूल में कमर तक पानी में खड़े होकर योगासन किए जाते हैं। पानी शरीर का भार कम महसूस कराता है, जिससे जोड़ों और मांसपेशियों पर दबाव घटता है। यही कारण है कि इसे विशेष रूप से बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं, अधिक वज़न वाले लोगों और जोड़ों के दर्द से पीड़ित व्यक्तियों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।उत्तर प्रदेश में प्रयाग आरोग्यम् केंद्र के प्रमोटर व योगाचार्य प्रशांत शुक्ल की व्यक्तिगत पहल के कारण गर्मियों…

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वृद्धावस्था में मानव स्वस्थ रहे, यह 21वीं सदी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2050 तक दुनिया में 80 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों की संख्या में भारी इजाफा हो गया रहेगा। यह मानव सभ्यता की एक बड़ी उपलब्धि तो है, पर स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियाँ भी बड़ी हैं। उम्र बढ़ने के साथ हृदय रोग, मधुमेह, गठिया, अल्जाइमर, पार्किंसन, अवसाद और शारीरिक निर्बलता जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं। इसलिए, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मौजूदा दशक को स्वस्थ आयु-वृद्धि का दशक घोषित कर रखा है। चूंकि अब योग की वैज्ञानिकता भी साबित हो…

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