Author: Kishore Kumar

Spiritual journalist & Founding Editor of Ushakaal.com

छत्रपति शिवाजी महाराज और समर्थ रामदास के बीच का यह प्रसंग भक्ति, समर्पण और कर्तव्य की पराकाष्ठा है कि कैसे एक महान शासक ने अपना संपूर्ण राज्य अपने गुरु के चरणों में अर्पित कर दिया और गुरु ने उसे राजधर्म का पाठ पढ़ाकर लोक कल्याण के मार्ग पर प्रशस्त किया। प्रस्तुत कथा श्रीहनुमान के अवतार के रुप में प्रसिद्ध समर्थ रामदास पर आधारित माधवराव सप्रे की पुस्तक “दासबोध” पर आधारित है, जिसमें समर्थ रामदास और शिवा जी महाराज के बीच प्रेरक संवाद है।कथा है कि एक दिन समर्थ माहुली-संगम पर स्नान-संध्या करके भिक्षा माँगते हुए शिवाजी के महल में पहुंच…

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हमने अभी-अभी महाशिवरात्रि मनाई। शिव-शक्ति के मिलन का आध्यात्मिक मर्म और भोलेनाथ के नीलकंठ स्वरुप का निहितार्थ समझा। अब दो दिनों बाद ही यानी अठारह फरवरी को उन्नीसवीं सदी के महान संत श्रीरामकृष्ण परमहंस की जयंती है। उन्हें भी आधुनिक युग का नीलकंठ कहा गया है। उन्होंने संसार की वैचारिक कट्टरता और कलह का विष पीकर “ईश्वर एक है’ की उद्घोषणा के रुप में अमृत प्रदान किया था। धर्मों की सारभूत एकता वाले इस संदेश के जरिए साबित किया कि “महोपनिषद्” में वर्णित “वसुधैव कुटुंबकम्” सार्वभौमिक बंधुत्व का बीज मंत्र है। उनके दिव्य गुणों के कारण ही कहा गया कि…

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किशोर कुमार // योग की बेहतर शिक्षा किस देश में और वहां के किन संस्थानों में लेनी चाहिए? यदि इंग्लैंड सहित दुनिया के विभिन्न देशों से प्रकाशित अखबार “द गार्जियन” से जानना चाहेंगे तो भारत के बिहार योग विद्यालय का नाम सबसे पहले बताया जाएगा। चूंकि ऐसा सवाल पश्चिमी देशों में आम है। इसलिए “द गार्जियन” ने लेख ही प्रकाशित कर दिया। उसमें भारत के दस श्रेष्ठ योग संस्थानों के नाम गिनाए गए हैं। बिहार योग विद्यालय का नाम सबसे ऊपर है। इस विश्वव्यापी योग संस्थान के संस्थापक परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती की समाधि के दस साल होने को हैं। फिर भी बिहार योग का आकर्षण…

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दुनिया भर में वेलेंटाइन वीक की धूम है। रोमांटिक शेर ओ शायरी से सोशल मीडिया अंटा पड़ा है। प्रेम का संदेश देने वाले भारतीय सूफी संत परंपरा के महान कवि बुल्लेशाह के प्रेम के रंग में रंगे दोहे भी सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हैं। पचास साल पहले सुप्रसिद्ध भजन गायक नरेंद्र चंचल द्वारा राजकपूर की फिल्म “बॉबी” के लिए गाया गया गीत बैकग्राउंड में बज रहा है – बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो, बुल्लेशाह वे कहते। पर प्यार भरा दिल कभी न तोड़ो, इस दिल में दिलबर रहता…। हमें फिल्म का संदर्भ याद रह गया, गीत के बोल याद रह गए। पर…

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महाशिवरात्रि का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि इसमें मानसिक उद्वेगों और बिखरते रिश्तों को संभालने का एक गहरा मनोवैज्ञानिक सूत्र अंतर्निहित है। पर, हम सब इस महान अवसर को सजगता के अभाव में यूं ही हाथों से जाने देते हैं। शिवरात्रि वाली सुबह से लेकर रात तक हर तरफ ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के उद्घोष से आकाश गुंजायमान होता है। भव्य शिव बारात के दौरान देवों से लेकर गणों तक की जीवंत झांकियों के साथ शंखों की ध्वनि और डमरू की थाप पर झूमते भक्तों के कारण अद्भुत उत्सवी माहौल बनता है। पर, हम इस शिवमय…

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भक्ति की पावन गंगा जब हृदय की कंदराओं से फूटती है तो वह ऊंच-नीच, जाति-कुल और शास्त्र-ज्ञान की समस्त सीमाओं को लांघकर सीधे परम तत्व में विलीन हो जाती है। शबरी माता का जीवन इसी आध्यात्मिक लोकतंत्र का वह जीवंत दस्तावेज है, जो सदियों से मनुष्यता को सिखा रहा है कि ईश्वर किसी मंदिर की चारदीवारी या जटिल कर्मकांडों में नहीं, बल्कि भक्त के निश्छल अनुराग और अटूट प्रतीक्षा में निवास करता है। आज के इस भागदौड़ भरे और दिखावे वाली दुनिया में शबरी जयंती केवल एक पौराणिक कथा का स्मरण मात्र नहीं है, बल्कि यह अंतर्मन की शुचिता और…

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चेतना की गहराइयों में उतरना किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि यह हमारे देखने का नजरिया पूरी तरह बदल देता है। बीसवीं सदी के महान योगी महर्षि महेश योगी द्वारा प्रतिपादित ट्रान्सेंडैंटल मेडिटेशन या “भावातीत ध्यान” वह कुंजी है, जो हमें जीवन के सबसे सूक्ष्म और आनंदमय स्तरों तक ले जाती है। जब हम ध्यान के माध्यम से मन की शांति का अनुभव करते हैं, तो हम केवल शांत नहीं होते बल्कि एक नई दृष्टि प्राप्त करते हैं। यह दृष्टि हमें सामान्य जगत के भीतर ही एक स्वर्णिम युग का आभास कराने लगती है। जीवन अपनी पूरी सुंदरता के…

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अद्वैत वेदांत और सनातन धर्म की अविरल परंपरा में ज्योतिर्मठ, श्रृंगेरी मठ, शारदा और गोवर्धन मठ आदि शंकराचार्य की अमर देन हैं और सनातन धर्म के हृदय-स्थल हैं। वहीं, इन पीठों पर आसीन शंकराचार्य उस प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षक हैं। इसलिए, चार पीठों और उनके शंकराचार्यों का बड़ा महत्व है। इनको लेकर किसी भी प्रकार का विवाद धर्म की हानि के तौर पर देखा जाता है। भारतीय दर्शन प्रचार या बहस के लिए नहीं, बल्कि आचरण के लिए है। ज्ञान की सिद्धि अनुभव में निहित है और संतों में द्वैत भाव अंशमात्र रह जाए तो समय रहते समाधान भी जरूरी होता है।आधुनिक…

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लाखों साल पहले हमारी धरती ज्ञान-विज्ञान के मामले में कितनी समृद्ध रही होगी, इसके प्रमाम हमारे वैदिक शास्त्र हैं। आज मंगलवार है। इसे बजरंगबलि का दिन माना जाता है। सनातन धर्म में सप्ताह के प्रत्येक दिन को किसी न किसी देवता को समर्पित किया गया है। मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को शक्ति, साहस और युद्ध का कारक माना गया है। हनुमान जी भी बल और पराक्रम के देवता हैं, इसलिए मंगल ग्रह की शांति और कृपा के लिए मंगलवार को उनकी पूजा की जाती है। इसलिए, मैंने आज के दिन को हनुमान जी…

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भारत का अभ्युदय एक आध्यात्मिक क्रांति है। यह कभी कोई साधारण भूखंड नहीं रहा, बल्कि साधना की इस भूमि पर ऋषि-संतों की परंपरा फली-फूली और यहीं से वैदिक वाणी प्रवाहित हुई। इस देश ने सदैव आध्यात्मिक ज्ञान-विज्ञान और अंतर्यात्रा को भौतिक प्रगति से ऊपर रखा। इसी वजह से यह देश विश्व गुरु कहलाया। जब दुनिया के अन्य भू-खंडों पर साम्राज्यवादी विस्तार की भावना प्रबल थी, तब भी भारत की धरती पर विश्व बंधुत्व की भावना घनीभूत की जाती रही। यहां के ऋषि-मुनि जगत के कल्याण के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते रहे और आध्यात्मिक उत्थान के जरिए मानवता को अंधकार…

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