Author: Kishore Kumar

Spiritual journalist & Founding Editor of Ushakaal.com

कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाले योग प्रशिक्षक अब हमारी आपकी दहलीज पर दस्तक देने लगे हैं। एआई अनुकूलित यौगिक उपायो के रुप में उनकी कोंपलें निकल आई हैं। इसके कारण भारत सहित दुनिया भर में योग का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। योगशास्त्रों में योग का अंतिम लक्ष्य आत्मोत्थान कहा गया है। पर, दुनिया भर में ज्यादातर लोग स्वास्थ्य कारणों से योगाभ्यास करते हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अनुकूलित योग उपायों से स्वास्थ्य संवर्द्धन की चाहत वाले योगाभ्यासियों का कितना हित होगा? कही ऐसा तो नहीं होगा कि एआई अनुकूलित यौगिक उपाय योग विद्या के…

Read More

स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और डिजिटल उपकरण हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। ये तकनीकें हमें दुनिया से जोड़ती हैं। लेकिन इसका बुरा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। हमारा शरीर केवल मांस, हड्डियों और रक्त का बना कोई यंत्र नहीं, बल्कि अत्यंत सुसंवेदनशील, सजग और लयबद्ध तंत्र है, जो हमारी प्रत्येक क्रिया-प्रतिक्रिया से प्रभावित होता है। इसलिए, डिजिटल आदतें न केवल हमें थकाती हैं, बल्कि नींद, खुशी और एकाग्रता के लिए आवश्यक सेरोटोनिन और मेलाटोनिन जैसे रसायनों का संतुलन बिगड़ जाता है। छोटे बच्चों का मनोविकार से ग्रस्त होना इस बात का प्रमाण है। ऐसे में योग…

Read More

श्रावण महीना हिंदू धर्म में भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष रूप से पवित्र माना जाता है। यह महीना भक्ति, तपस्या, और आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित है, क्योंकि इस समय प्रकृति और मानव चेतना का तालमेल विशेष रूप से शक्तिशाली होता है। पर, शिव-शक्ति आकाश रेखा पर अवस्थित मंदिरों का विशेष आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। ये मंदिर न केवल भगवान शिव और शक्ति के प्रतीक हैं, बल्कि प्राचीन भारतीय यौगिक विज्ञान और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ मानव जीवन के संबंधों को भी दर्शाते हैं।जरा सोचिए, हज़ारों साल पहले, जब न कोई उपग्रह था, न जीपीएस, न ही…

Read More

आध्यात्मिक खोज का पथ कभी सुगम नहीं होता। यह एक ऐसी यात्रा है, जो हृदय की गहराइयों से शुरू होती है और अनंत की ओर बढ़ती है। बिहार योग विद्यालय के संस्थापक परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उनका जन्म एक जमींदार परिवार में हुआ था। पिता पुलिस अधिकारी थे। किशोरावस्था में ही उनके मन में आध्यात्मिक जिज्ञासा ने जन्म ले लिया था। संसार की क्षणभंगुरता और जीवन के गहरे अर्थ की खोज ने उन्हें बेचैन कर दिया। लिहाजा, घर की सुख-सुविधाओं का परित्याग कर सत्य की तलाश में निकल पड़े थे। वे सबसे पहले…

Read More

वैदिक परंपरा में गुरु को वह प्रकाश माना गया है, जो शिष्य के जीवन से अज्ञान के अंधेरे को दूर करता है। चाहे वह आदियोगी शिव हों, ऋषि वशिष्ठ हों, भगवान श्रीकृष्ण हों, आद्यगुरू शंकराचार्य हों, या द्रोणाचार्य, सभी ने अपने शिष्यों को न केवल ज्ञान दिया, बल्कि उन्हें जीवन के उच्च आदर्शों, धर्म, और कर्तव्य के प्रति जागरूक किया। गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह दिन गुरु के प्रति कृतज्ञता, सम्मान और श्रद्धा प्रकट करने का अवसर है। अच्छी बात यह है कि…

Read More

भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा तो हर साल होती है। पर उनका नवकलेवर तभी होता है, जब हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास में अधिक मास (दो आषाढ़ मास) पड़ता है, जो आमतौर पर 8, 12, या 19 वर्षों के अंतराल पर होता है। उदाहरण के लिए, सन् 2015 में नवकलेवर हुआ था, तो यह संयोग सन् 2034 में बनने की संभावना है। फिर भी समस्त जड़ और चेतन के स्वामी, जगत के नाथ श्री जगन्नाथ का नवकलेवर चर्चा में है। इसकी वजह बनी है नवकलेवर पर निर्मित फिल्म। वैसे तो भगवान जगन्नाथ की महिमा पर आधारित कई फिल्में बन चुकी हैं। इनमें कोई पंद्रह भाषाओं…

Read More

प्राचीनकाल में जिस योग और वैदिक ज्ञान की अखंड धारा ने भारत को ‘विश्वगुरु’ का गौरव प्रदान किया था, आज उसी अमर परंपरा को पुनर्जीवन मिलता दिख रहा है। 11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर इसकी झलक दिखी, जब भारत ने योग को केवल आसन-प्राणायाम तक सीमित न रखकर, एक समग्र जीवनदर्शन के रूप में विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया। काल के प्रवाह में क्षीण हुई ज्ञान-गंगा, जो मानवता को सत्य, शांति और सामंजस्य की ओर ले जाती थी, योग के माध्यम से पुनः प्रवाहित होती दिखी। यह ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के अनुरुप है।अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रारंभ होने…

Read More

उन्नीसवीं सदी में भक्ति परंपरा के महान संत स्वामी रामानंद में भक्तिभाव रखने वाले व्यापारी पिपा समुद्री मार्ग से यात्रा पर थे। अचानक, आसमान काला पड़ गया। बादल गरजने लगे, और समुद्र में भयंकर तूफान उठ खड़ा हुआ। लहरें ऐसी उछल रही थीं, मानो जहाज को निगल लेना चाहती हों। तभी पिपा जी का ध्यान गुरू और अराध्य श्रीराम पर गया। उनकी आर्त पुकार का असर हुआ कि वो तूफान, जो अभी-अभी सब कुछ उजाड़ने को तैयार था, धीरे-धीरे शांत हो गया। लहरें थम गईं और बादल छट गए। जहाज सुरक्षित किनारे पर पहुँच गया। भक्तमाल की टीका में प्रियादास…

Read More

जब दुनिया भर में अशांति है और एक दूसरे पर गोला-बारूद बरसाए जा रहे हैं, वैसे में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीमें अक्सर चौंकाती हैं। कभी ‘वसुधैव कुटुम्बकम के लिए योग’ थीम होती है तो कभी “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग।” विदेशी आक्रमणकारियों ने सदैव भारत को क्षति पहुंचाने की कोशिश की। बावजूद, “वसुधैव कुटुंबकम” की भारतीय अवधारणा की जड़ें कमजोर होने के बजाय गहरी ही होती गईं। स्वामी विवेकानंद, परमहंस योगानंद, स्वामी रामतीर्थ, परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती, महर्षि महेश योगी जैसे आत्मज्ञानी संतों कभी अपने को दायरे में नहीं रखा, बल्कि योग और अध्यात्म की शक्ति से…

Read More

कौन ठगवा नगरिया लूटल हो…चंदन काठ के बनल खटोला, ता पर दुलहिन सूतल हो…कौन ठगवा नगरिया लूटल हो…भक्तिकाल के अनूठे संत कबीर दास का यह निर्गुण भजन सुनते ही मन की गहराइयों में उतर जाता है। इसकी हर पंक्ति आत्मा को झकझोरती है और जीवन की नश्वरता का सत्य सामने लाती है। पद्मश्री प्रह्लाद सिंह टिप्पनिया और भारती बंधु जैसे लोक गायकों से लेकर शास्त्रीय संगीत के महान गायक कुमार गंधर्व तक, सभी ने इस भजन को अपनी आवाज में अमर किया। लेकिन जब सन् 1984 में अमोल पालेकर की फिल्म “अनकही” के लिए आशा भोसले ने इसे गाया और…

Read More