आधुनिक युग के वैज्ञानिक संत, बीसवीं सदी के महान संत परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी और विश्व प्रसिद्ध बिहार योग विद्यालय के परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती की पावन उपस्थिति में 1, 2 व 3 मई 2026 को नई दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में योग साधना सत्र का आयोजन किया गया है। जो लोग बिहार योग विद्यालय की प्रकृति के नहीं जानते, उन्हें योग सत्र नाम से ऐसा लग सकता है कि यह योग सत्र भी किसी सामान्य योग सत्रों की तरह होगा। पर, ऐसा है नहीं।
हम सभी जानते हैं कि शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शान्ति एवं आध्यात्मिक आनन्द प्राप्त कराने वाली योगविद्या का किस तरह व्यवसायीकरण हुआ है। पर, बात यही तक नहीं है, बल्कि योग के मूल स्वरुप को भी परिवर्तित करके समाज के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। परिणाम है कि लोग योगविद्या के मूल उद्देश्य को भूल रहे हैं। सत्यानन्द योग दुनिया भर में योग के वास्तविक स्वरूप को पुनर्स्थापित करने की दिशा में सतत प्रयत्नशील है। ताकि योग एवं अध्यात्म की गहन अनुभूतियों का स्पष्ट विवेचना हो सके और जीवन में योग के शुद्ध स्वरुप के जरिए जीवन का रुपांतरण हो सके।
इस आयोजन का दार्शनिक आधार वेदांत और योगदर्शन की उस केन्द्रीय अंतर्दृष्टि पर टिका है, जिसका शाश्वत संदेश है – आत्म-विकास का मार्ग बाहर नहीं, भीतर है। जिस सुख, शान्ति और परितोष को हम जीवन भर बाहरी जगत में तलाशते रहते हैं, वह वस्तुतः हमारे अपने अन्तस में सदा से विद्यमान है। भूतकाल से लगाव, वर्तमान से असंतोष और भविष्य की चिंता, इन तीनों का समिश्रण हमारे दुख का मूल कारण बन गया है।
कार्यक्रम के संयोजक स्वामी शिवराजानंद सरस्वती कहते हैं, “बिना मन को बदले संसार में सुख खोजना मृगतृष्णा है।” यही सत्यम् योग प्रसाद है, जिसे जन–जन तक पहुँचाने के लिए श्री स्वामी निरंजनानन्द सरस्वती अपनी भारत योग यात्रा के क्रम में नई दिल्ली पधारने वाले हैं।
सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि प्रवेश निःशुल्क है। ऐसे समय में जब एक घंटे की योगा क्लास के लिए सैकड़ों रुपये चुकाने पड़ते हैं। वैसे में इस आयोजन का एक गहरा संदेश भी है कि योग-ज्ञान किसी विशेष वर्ग की थाती नहीं, बल्कि समाज की साझी विरासत है। इसलिए, इस नि:शुल्क कार्यक्रम में भाग लेकर कोई भी अपने जीवन को संवारने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
।

