Author: Kishore Kumar

Spiritual journalist & Founding Editor of Ushakaal.com

विलियम आर्थर की बर्बरता से तो हम सब परिचित हैं ही। ये वही अंग्रेज अधिकारी हैं, जो 1942 में पटना में जिला मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत थे और उनकी बर्बरता के कारण भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अहिंसक आंदोलन कर रहे सात छात्रों को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी थी। इस लेख का विषय बेशक यह नहीं है, बल्कि महान योगी श्री अरविंदों के वैदिक ज्ञान के आलोक में वैदिक ज्ञान की महत्ता और सुपरमाइंड की संभावना बतलाना है। ताकि युवापीढ़ी में भारत के प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान की समझ बने और उसके पुनर्जनन में उसका योगदान हो। पर…

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श्रीराम का अवतरण सूर्यवंश (इक्ष्वाकु वंश) में हुआ था, जो क्षत्रिय कुल माना जाता है। श्रीकृष्ण का अवतरण यदुवंश (चंद्रवंश) में हुआ था। हालांकि, उनका पालन-पोषण गोकुल में नंद और यशोदा के द्वारा एक ग्वाला (यादव) परिवार में हुआ, लेकिन उनकी वंशावली चंद्रवंशी क्षत्रिय ही थी। पर, क्या हमने उन्हें किसी जातीय दायरे में रखने की कभी कोशिश की? नहीं। फिर श्री चित्तगुप्त या श्री चित्रगुप्त, जिन्हें ब्रह्मा जी के चित्त (मन) या काया (शरीर) से अवतरण और ब्रह्मा जी के आदेश से ही भूलोक यानी पृथ्वी पर विशेष उद्देश्य से प्रकटीकरण माना जाता है और जो पाप-पुण्य का लेखा-जोखा…

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स्वामी सत्यानंदजी महाराज देश में आर्यसमाज के बड़े आध्यात्मिक नेता थे। सन् 1925 में उन्हें दयानंद जन्मशताब्दी समारोह के दौरान एकांतवास करने की आंतरिक प्रेरणा हुई। चले गए डलहौजी। साधना के दौरान ब्यास पूर्णिमा की रात उन्हें “राम” शब्द बहुत ही सुंदर और आकर्षक स्वर में सुनाई दिया। फिर आदेशात्मक शब्द आया – राम भज…राम भज…राम भज। स्वामी सत्यानंदजी महाराज समझ गए कि श्रीराम की अनुकंपा हो चुकी है। इस तरह वे आर्यसमाज से नाता तोड़कर पूरी तरह राम का गुणगाण करने में जुट गए। इसके बाद “राम शरणम्” नाम से संस्था बनाई, जिसका प्रभाव आज भी खासतौर से उत्तर…

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चैत्र नवरात्रि केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि मानव चेतना के उत्थान और दिव्य शक्ति के साथ से जुड़ने का एक शक्तिशाली अवसर है। प्रत्येक दिन माँ के एक रूप की पूजा चक्रों को जागृत करती है, जो मूलाधार से सहस्रार तक चेतना को ऊपर उठाती है। इसका परिणाम होता है कि साधक के भीतर अज्ञान, अहंकार, क्रोध और लोभ रूपी आंतरिक असुरों का नाश होता है। इससे आत्म-शुद्धि होती है और शरीर, मन, और आत्मा लयबद्ध हो जाते हैं। तब चैत नवरात्रि के अंतिम दिन धरा पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का आविर्भाव होता है। यह इस बात का प्रतीक…

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चंडीगढ़ स्थित  गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ योगा एजुकेशन एंड हेल्थ परिसर में सूर्य नमस्कार कार्यक्रम सफल रहा। यह कार्यक्रम “संकल्प पूर्ति समारोह” के तहत हरियाणा योग आयोग के सहयोग से किया गया था। इस मौके पर पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। योगाभ्यासियों ने अनुशासन और तालमेल के साथ सूर्य नमस्कार के 6 राउंड किए। इनमें भारतीय सेना के प्रतिनिधि, विभिन्न कॉलेजों के छात्र, और आयुष प्रशिक्षक शामिल थे।इस मौके पर चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव राजीव वर्मा, हरियाणा योग आयोग के अध्यक्ष जयदीप आर्य, स्वास्थ्य सचिव अजय चागती, आयुष निदेशक…

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भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स नौ महीने बाद धरती पर सकुशल वापसी के बाद अब आध्यात्मिक कारणों से चर्चा में हैं। हम सब जानते हैं कि सुनीता विलियम्स अपनी भारतीय विरासत से मजबूती से जुड़ी हुई हैं। तभी वह अपने अंतरिक्ष मिशनों के दौरान कभी भगवद्गीता और रामायण साथ लेकर गई तो कभी गणेश भगवान की मूर्ति। उन्होंने अंतरिक्ष में दीपावली तक मनाई थी।चुनौतीपूर्ण अंतरिक्ष यात्रा के दौरान उनके धैर्य, साहस और आत्मविश्वास को उनके आध्यात्मिक रुझानों के संदर्भ में देखा जा रहा है। तो क्या सुनीता विलियम्स को कठिन वक्त में भगवद्गीता से धैर्य (कर्तव्य पर…

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आध्यात्मिक शिक्षा से मानव का समग्र कल्याण हो सकता है, यह कोई कपोल कल्पना नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है और सदैव प्रमाणित होता रहा है। इसलिए ब्रह्माकुमारी संगठन का “समग्र कल्याण के लिए आध्यात्मिक शिक्षा” अभियान सराहनीय है। इस अभियान को व्यक्तिगत परिवर्तन से शुरू होकर सामाजिक और वैश्विक सुधार तक पहुँचने के एक प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने हरियाणा के हिसार स्थित ब्रह्माकुमारी संगठन की स्वर्ण जयंती समारोह में इस अभियान का श्रीगणेश करते हुए ठीक ही कहा कि आध्यात्मिकता पर आधारित सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक,…

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होलिका दहन और होली की पौराणिक कथाएं तो हम सब जानते हैं। पर, आध्यात्मिक नजरिए से होलिका दहन आंतरिक अज्ञानता को जलाने का प्रतीक है। यानी बुरी आदतों का परित्याग और सकारात्मक बदलावों की ओर अग्रसर होना। पूर्व के कुछ काल-खंडों में ऐसी परंपरा रही है कि लोग होलिका दहन को क्रोध, ईर्ष्या, चिंता, आलस्य, व्यसन आदि को होलिका की आग में जलाने का संकल्प लेते थे। आत्म-शुद्धि के लिए इसे जरूरी माना जाता था। योगशास्त्र में ऐसे परिणाम लेने के लिए अलग उपाय बतलाए गए हैं। वैज्ञानिकों ने कोई उपाय तो नहीं बताए। परन्तु, साबित कर दिखाया कि ऐसे…

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रंग है, गुलाल है। मस्ती है, आनंद है। सतरंगी उत्सव है, उल्लास का महोत्सव है। तभी ब्रज की मस्ती भरी होली हो, महाराष्ट्र की मटकी होली हो या बरसाने की लट्ठमार होली, सभी का अंतर्निहित भाव एक है। वह है – आत्मा का परमात्मा से मिलन। इसे ही बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी देखा जा सकता है। शास्त्रों में उल्लेख है और संत-महात्मा अपने अनुभवों के आधार पर कहते रहे हैं कि सात्विक गुणों में अभिवृद्धि होती है तो अंतर्मन में प्रेम और श्रद्धा का दीपक जलता है। ऐसे मन में ही आनंद का आविर्भाव होता है और जीवन उत्सव बन…

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क्या भगवान का अस्तित्व है? जिस देश को कभी सपेरों का देश कहा जाता था, वहां के लोग बिना देरी किए हां में उत्तर दे तो बात समझ में आती है। पर, इस बार बारी है हार्वर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ विली सून की। उन्होंने अपनी प्रयोगशाला में लंबे समय तक गणितीय आधार पर शोध किया और इस निष्कर्ष पर हैं कि भगवान का अस्तित्व है। वे कहते हैं कि ब्रह्मांड की संरचना और उसमें मौजूद संतुलन इतना सटीक है कि यह संयोग मात्र नहीं हो सकता। यह जागरूक बुद्धिमत्ता से किया गया डिज़ाइन प्रतीत होता है।डॉ सून का यह…

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