Author: Kishore Kumar

Spiritual journalist & Founding Editor of Ushakaal.com

लोक आस्था का महापर्व छठ पर्व अपने चरम पर है। माहौल सर्वत्र भक्तिमय है। इस महापर्व को लेकर कथाएं तो अनेक हैं। पर, आधुनिक युग के लिहाज से सबसे विश्वसनीय कथा यह है कि इस महापर्व ने प्रवासन और आधुनिकीकरण की चुनौतियों के बावजूद, अपनी आस्था की शक्ति से खुद को न केवल बचाए रखा है, बल्कि वैश्विक पहचान बना ली है। साथ ही लाखों लोगों को जड़ों से जोड़े रखकर साझी सांस्कृतिक पहचान प्रदान की है। आने वाले समय में यह महापर्व यूनेस्को की विश्व सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल हो जाए तो कोई आश्चर्य नहीं।सृष्टि के प्रारंभ से…

Read More

सारे पर्व-त्योहार इतिहास के पन्ने हैं। जब हम उन ऐतिहासिक घटनाओँ की याद में उत्सव मनाने हैं तो अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहते हैं। यौगिक दृष्टिकोण से इससे भी बहुमूल्य बात यह है कि जब हम उन ऐतिहासिक घटनाओँ के संदेशों को आत्मसात करते हुए अपनी चेतना का क्रमिक विकास भी करते हैं तो जीवन में पूर्णता आती है। बात शास्त्रसम्मत और विज्ञानसम्मत दीपावली की हो या लक्ष्मी व काली पूजन की, इन सभी मामलों में ये सिद्धांत ही काम करते हैं। पर, समय व देश-काल की प्रकृति के अनुरुप इन त्योहारों के साथ कई भ्रांत धारणाएं जुड़कर परंपरा…

Read More

एक सौ साठ देश… पाँच हज़ार ध्यान केंद्र… सोलह हज़ार प्रशिक्षक… और दो करोड़ साधक! यह महज़ आँकड़ा नहीं, बल्कि आठ दशकों से प्रवहमान उस यौगिक और आध्यात्मिक यात्रा की जीवंत कहानी है, जो भारत के एक छोटे से कस्बे से आरंभ होकर आज दुनिया भर के लोगों की जीवन-पद्धति का हिस्सा बन चुकी है। श्री रामचंद्र मिशन का अभियान उत्तर प्रदेश के फतेहगढ़ से विस्तार पाता हुआ यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका तक फैल चुका है। दूसरी तरफ रामाश्रम सत्संग है, जो मथुरा के साथ ही देश-विदेशों के कई स्थानों पर लाखों अनुयायियों की आस्था…

Read More

किशोर कुमार // हम सब मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान से तो परिचित हैं ही। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अधीन एकमात्र स्वायत्तशासी संगठन है, जिसका उद्देश्य एक केंद्रीय एजेंसी के रूप में योग अनुसंधान, योग चिकित्सा, योग प्रशिक्षण और योग शिक्षा को बढ़ावा देना है। नई पीढ़ी के ज्यादातर लोगों को पता नहीं होगा कि योग के इस मंदिर की स्थापना महान योगी स्वामी धीरेंद्र ब्रह्मचारी की परिकल्पना औऱ उनके श्रमसाध्य प्रयासों का प्रतिफल है। तब यह विश्वायतन योगाश्रम के रूप में जाना जाता था। पर मैं आज स्वामी धीरेंद्र ब्रह्मचारी की जीवनी भी लिखने नहीं बैठा हूं।…

Read More

हंस (आत्मा) उड़ गया। काया (शरीर) मुरझा गई। शास्त्रीय संगीत की एक सशक्त आवाज सदा के लिए खामोश हो गई। जो मृत्युलोक में आया है, उसकी यही गति होनी है। पर, शास्त्रीय गायन की विशिष्ट शैलियों के जरिए ईश्वर से सीधा संवाद करने वाले सुरों, रागों और नादयोग के मर्मज्ञ पंडित छन्नूलाल मिश्र का जाना एक भक्त के जाने जैसा है, जो तभी तक आगे की ओर गति करता है, जब तक कि वह परमात्मा तक पहुंच न जाए। सामान्यत: जाने वाले लौट भी आते हैं। बदले हुए स्वरुप के कारण हम उन्हें पहचान नहीं पाते। पुनर्जन्म का सिद्धांत यही…

Read More

 विजयादशमी का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है और इससे जुड़ी अनेक कथाएं भी हैं। बेशक, ये कथाएं अलग-अलग काल-खंडों के हैं। पर, इन कथाओं से इतना पता चलता है कि शुभ कार्य शुभ समय में ही होते हैं और सदैव असत्य पर सत्य की जीत होती है। त्रेतायुग से महानवमी के बाद विजयादशमी या दशहरा मनाए जाने की कथा श्रीराम से जुड़ी हुई है। श्रीराम ने नवरात्रि के दौरान देवी के नौ स्वरुपों की साधना करके दैवी कृपा प्राप्त की थी। ताकि आसुरी शक्तियों का नाश किया जा सके।श्रीराम को पता था कि सृष्टि के प्रारंभिक दिनों से ही किस…

Read More

दैवी शक्तियों की कथाएं सांकेतिक होती हैं। भारतीय संस्कृति में वैदिककालीन या उसके पूर्व की जितनी भी घटनाएं हैं, उनकी अभिव्यक्ति कथाओं और प्रतीकों के माध्यम से की गईं। उन कथाओं का सार इसमें है कि उनसे मिले संकेतों के आधार पर हम अपना जीवन किस तरह बेहतर बना पाते हैं। दुर्गासप्तसती की कथाओं से हमें पता चलता है कि माता रानी की दिव्य शक्ति से राक्षसी शक्तियों का संहार होता गया था। सृष्टि के आरंभिक दिनों की ये कथाएं हमारे मानस में रची-बसी हैं तो अकारण ही नहीं है। उन कथाओं के गहरे संदेश हैं। हमारी क्रमिक साधनाओं के…

Read More

नव संवत्सर की शुरुआत ही देवी की आराधना से होगी। सृष्टि की रचना देवी से हुई थी। ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीकात्मक रूप भी वे ही हैं। उपनिषद में कहा गया है कि पराशक्ति ईश्वर की परम शक्ति है। यही विविध रूपों में प्रकट है। आत्मज्ञानी संत प्राचीन काल से कहते रहे हैं कि देवी या शक्ति सभी कामनाओं, ज्ञान और क्रियाओं का मूलाधार है। अब वैज्ञानिक भी कह रहे हैं कि प्रत्येक वस्तु शुद्ध अविनाशी ऊर्जा है। यह कुछ और नहीं, बल्कि उस दैवी शक्ति का एक रूप मात्र है, जो अस्तित्व के प्रत्येक रूप में मौजूद है। नवरात्रि के दौरान हम उसी…

Read More

वाराणसी के रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला के बारे में तो आपने सुना ही होगा। ऐसी अनूठी रामलीला, जिसके लिए पूरा नगर ही विशाल रंगमंच बन जाता है। गंगा तट अयोध्या तो बड़ा मैदान जनकपुर और किले के पास का इलाका लंका बन जाता है। यह कोई दस दिनों तक चलने वाली रामलीला नहीं होती, बल्कि महीना भर राम कथाओं की प्रगति श्रीराम के जीवन की क्रमवार यात्रा के रूप में होती रहती है। बस, बाकी रामलीलाओं से अलग यह होता है कि रावण मारा नहीं जाता, बल्कि वह श्रीराम के चारणों में समर्पण कर देता है। सन् 1830 में काशी…

Read More

तपस्या केवल बाहरी कठोर साधना नहीं है, बल्कि इन्द्रियों की शुद्धि, हृदय की पवित्रता और प्रभु से एकत्व का अनुभव ही वास्तविक तप है। इसी से ज्ञान की प्राप्ति होती है। वही अमृत है, वही मुक्ति है। छांदोग्य उपनिषद, कठोपनिषद और श्रीमद्भगवतगीता जैसे ग्रंथों की गूढ़ बातें ब्रह्मर्षि कृष्णदत्त जी महाराज शवासन शवासन की अवस्था में ठीक वैसे ही सुना रहे थे, जैसे दिव्य दृष्टि वाले संजय महाभारत की घटनाओं का आंखों देखा हाल सुना रहे थे।  ऐसा कोई पहली बार नहीं था। बाल्यावस्था से ही वे जब कभी शवासन में होते, तो उनकी स्थिति योग समाधि जैसी बन जाती…

Read More