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इसलिए ज्ञान के असीम सागर हैं श्री हनुमान
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जय हनुमान ज्ञान-गुण सागर…. गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्री हनुमान जी को “ज्ञान गुण सागर”…
जैसा भोजन, वैसा मन; जैसा मन, वैसा विचार; जैसा विचार, वैसा कर्म
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वैदिक परंपरा में ‘आहार’ शब्द का अर्थ केवल वह भोजन नहीं है जो हम मुख…
जब शिवाजी प्रधान सेवक बन गए थे
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छत्रपति शिवाजी महाराज और समर्थ रामदास के बीच का यह प्रसंग भक्ति, समर्पण और कर्तव्य…
प्रेम उठे तो स्वर्ग, गिरे तो नर्क
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दुनिया भर में वेलेंटाइन वीक की धूम है। रोमांटिक शेर ओ शायरी से सोशल मीडिया…
षट्कर्म की सरल नेति क्रिया के अद्भुत प्रभाव
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हठयोग तन और मन के संतुलन की एक सुव्यवस्थित पद्धति है और इसका षट्कर्म योग…
