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Author: Kishore Kumar
Spiritual journalist & Founding Editor of Ushakaal.com
स्वामी शिवानंद सरस्वती : अद्भुत प्रेरणादायी संत
कोई लाख करे चतुराई, करम का लेख मिटे न रे भाई…. छह दशक पहले कवि प्रदीप का गाया यह गीत आज भी लोगों की जुबान पर आ ही जाता है। खासतौर से तब, जब व्यक्ति कठिन दौर से गुजर रहा होता है। वैदिक ग्रंथों में भी प्रसंग है कि कर्म का फल भोगे बिना करोड़ों कल्प में कर्म क्षीण नहीं होता। चित्तगुप्त या चित्रगुप्त के बारे में भी यही मत है कि वे कर्मों के भले-बुरे प्रभावों का न्यायपूर्ण लेखा-जोखा रखते है, और प्रत्येक व्यक्ति को उसी अनुसार फल मिलता है।लेकिन, बीसवीं सदी के महान संत स्वामी शिवानंद सरस्वती शिष्यों…
श्रील प्रभुपाद और उनकी सूक्ष्म शक्तियों का असर
आत्मज्ञानी संतों की सूक्ष्म ऊर्जा हमें हर पल, हर क्षण स्पंदित करती है और सत्कर्मों के लिए प्रेरित करती है। इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्णाकांशसनेस (इस्कॉन) की स्थापना करके कृष्ण-भक्ति आंदोलन के जरिए दुनिया भर में छा जाने वाले श्रीमूर्ति श्री अभयचरणारविन्द भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपादजी इसके उदाहरण हैं। वे यदि भौतिक शरीर में होते तो आज 129 वर्ष पूरे कर चुके होते। उनकी महासमाधि के भी लगभग 47 साल होने को हैं। पर, उनकी सूक्ष्म ऊर्जा की शक्तियां भक्तों को उनकी उपस्थिति का सदैव अहसास कराती रहती है, प्रेरित करती रहती हैं।इसे कुछ उदाहरणों से समझिए। आध्यात्मिक फिल्म “महावतार नरसिम्हा”…
कैवल्यधाम योग संस्थान : योग और विज्ञान का संगम
महाराष्ट्र के योगी स्वामी कुवल्यानंद यौगिक क्रियाओं से मिलने वाले परिणामों को विज्ञान की कसौटी पर भी सिद्ध करके भारत के साथ ही पश्चिमी देशों में भी ख्याति अर्जित कर रहे थे। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को खुद ही कुवल्यानंद जी के योगाश्रम कैवल्यधाम में जाकर उनकी उपलब्धियों का साक्षी बनना चाहते थे। लिहाजा वे महाराष्ट्र के लोनावाला पहुंच गए, जहां कैवल्यधाम आकार ले रहा था। वे स्वामी जी की उपलब्धियों से बेहद खुश हुए। पर तुरंत ही उन पर संशय के बादल उमड़ने-घुमड़ने लगे। दरअसल, उन्हें आश्रम में पता चला कि स्वामी जी को अमेरिका में…
योग से होगा भटके बाल मन का उद्धार
अवयस्क छात्र-छात्राओं में बढ़ी हिंसक प्रवृत्तियां अब आम है। अक्सर बाल अपराध से जुड़ी कोई न कोई वीभत्स घटना अखबारों की सुर्खियां बनती हैं। यौन अपराध तो चरम पर है। ताज़ा राष्ट्रीय आँकड़े बताते हैं कि देश में नाबालिग लड़कों द्वारा नाबालिग लड़कियों के खिलाफ यौन अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। समाज शास्त्री इसकी प्रमुख वजह इंटरनेट, सामाजिक बदलाव, नैतिक शिक्षा की कमी, जागरूकता का अभाव आदि मानते हैं। पर, योग के परमहंसों की मानें तो बच्चों की हिंसक प्रवृत्तियां केवल बाह्य कारकों का परिणाम नहीं, बल्कि इसमें आंतरिक बदलावों की विशिष्ट भूमिका है।कैसे? जरा इसके विज्ञान को…
‘वैरिकोज वेंस’ के लिए बड़े काम हैं ये योगासन
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खतरे की घंटियों की हमने अनदेखी की। अब जीवन की धाराएँ ही अवरुद्ध होने लगी हैं। जी हां, वैरिकोज वेंस के कारण देश की पच्चीस फीसदी आबादी का जीवन तबाह है। पैरों की नीली, बैंगनी या लाल हो कर सूज चुकी नसें, पैरों और घुटनों से लेकर कमर तक के दर्द जीवन में जहर घोल रहे हैं। इंडियन वेन कांग्रेस 2024 की मानें तो वैरिकोज वेंस वाले लोगों की संख्या तीस फीसदी तक हो सकती है। एलोपैथी और आयुर्वेदिक पद्धतियों में तो इसका निदान है। पर, विभिन्न शोधों से पता चला है कि वैरिकोज वेंस, जिसे अपस्फीत शिरा या वेरिकोसाइटिस…
श्री अरविंद : भारत के रत्न, राष्ट्रवादी संत
अक्सर मन में ख्याल आता है कि जब विदेशियों को लगा था कि महान राष्ट्र नायक, स्वतंत्रता संग्राम के प्रेरणा स्तंभ और अद्वितीय आध्यात्मिक चेतना के अग्रदूत श्री अरविंद घोष नोबेल पुरस्कार के हकदार हैं, तो भारत सरकार को उन्हें “भारत रत्न” से विभूषित करने का ख्याल क्यों नहीं आया?भारत सरकार ने सन् 1992 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को मरणोपरांत भारत रत्न देने की घोषणा की थी। यह अलग बात है कि उनके परिवार ने कुछ कारणों से इस सम्मान को लेने इंकार कर दिया था। पर उसी नेताजी ने अपने पत्र में लिखा था – “अरबिंदो घोष बंगाल…
माता जानकी, प्रयागदास और रक्षाबंधन : अनोखी कथा
श्रावण का महीना था। गांव में रक्षाबंधन का दिन आया। हर बहन अपने-अपने भाई के हाथ पर राखी बाँध रही थी। कहीं हँसी के ठहाके, कहीं मिठाई की खुशबू। पर उस दिन एक कोना ऐसा भी था, जहाँ सात साल का छोटा-सा लड़का प्रयागदास अपनी माँ के पास बैठा, उदास होकर रो रहा था।”माँ… मुझे किसी ने राखी नहीं बाँधी!” माँ ने धीरे से कहा, “बेटा, तुम्हारी कोई बहन नहीं है…” बालक का सीधा-सा सवाल, “माँ! जब सबके पास हाथ-पाँव, नाक-कान हैं और बहन है… तो मेरी बहन क्यों नहीं?” माँ कुछ पल चुप रहीं, फिर बोलीं, “तुम्हारी भी बहन…
षट्कर्म : शुद्धि से सिद्धि तक की सीढ़ी
संत मत है कि घटशुद्धि से ही घटरूपी शरीर हठयोग साधना के योग्य होता है। घट की शुद्धि बिना यह कच्चे घड़े के समान है। यह लेख उसी घटशुद्धि के लिए षट्कर्म रुपी योग विद्या का विज्ञान बताने के लिए है। लेकिन पहले नाथपंथ के सिद्ध योगी चौरंगीनाथ से जुड़े एक प्रसंग पर गौर फरमाइए। चौरंगीनाथ को तमाम कोशिशों के बावजूद योग साधनाओं में सफलता नहीं मिल पा रही थी। तब गुरु को अपनी व्यथा सुनाई। कौन थे गुरु? मत्स्येंद्रनाथ? ज्ञानेश्वरी जैसे ग्रंथ में मत्स्येंद्रनाथ के बाद तथा गोरखनाथ के पहले गुरु-शिष्य परंपरा में चौरंगीनाथ का नाम आता है। दूसरी तरफ कई जगहों पर…
नागपंचमी और उसके आध्यात्मिक आयाम
अद्भुत! जीव-जंतुओं में भी ईश्वर का प्रतिरूप और उसकी पूजा! इसका मर्म वे क्या जानेंगे, जो जड़ों से कट गए और भारत को सपेरों का देश मानने लगे थे। पर, भारत जैसा आध्यात्मिक देश तो अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़ा हुआ है। वह जिस तरह राम और रावण में फर्क जानता है, उसी तरह नाग के गुण-दोष को भी समझता है। उसे मालूम है कि वासुकि नाग में विष भरा है तो अमृत निकालने के काम भी वही आता है। हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। त्रिगुणायत मानवों को ही देख लीजिए। उसमें एक तरफ शील है, मर्यादा…
पराजयवादी प्रवृत्ति को परास्त करो – यही मंत्र संबल बना
“मैं आपको अपने जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना के बारे में बताना चाहता हूँ, जो 1958 में घटी। आप में से कुछ ने इसे मेरी पुस्तक ‘विंग्स ऑफ फायर’ में पढ़ा होगा। लेकिन यहाँ उपस्थित युवाओं के लिए, जिन्होंने यह पुस्तक नहीं पढ़ी, मैं इसे दोहराना चाहूँगा। जब मैं एक छोटा बालक था, मेरा सपना था कि मैं उड़ान भरूँ। मेरे पास एक अद्भुत शिक्षक थे, शिवसुब्रमण्या अय्यर, जिन्होंने मुझे विज्ञान की ओर प्रेरित किया और उड़ान से संबंधित कुछ करने का विचार दिया। इसलिए मैंने वैमानिकी अभियांत्रिकी में प्रवेश लिया और 1957 में स्नातक हुआ, जो बहुत समय पहले…
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