Author: Kishore Kumar

Spiritual journalist & Founding Editor of Ushakaal.com

अशांत मन का प्रबंधन किसी भी काल में चुनौती भरा कार्य रहा है। आज भी है। योग ने तब भी राह निकाली। आज भी योग से ही राह निकलेगी। तब के वैज्ञानिक संत योगसूत्र दिया करते थे। आधुनिक युग में संन्यासी उन योगसूत्रों को सरलीकृत करके जन सुलभ करा चुके हैं और किसी जमाने में इसे संशय की दृष्टि से देखने वाला विज्ञान चीख-चीखकर कह रहा है – “योग का वैज्ञानिक आधार है। इसे अपनाओ, जिंदगी का हिस्सा बनाओ।“ पर अब लोगों के सामने यह सवाल नहीं है कि योग अपनाएं या नहीं। सवाल है कि अपेक्षित परिणाम किस तरह…

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पूरी दुनिया में एक तरफ ध्यान की लोकप्रियता आसमान छू रही है। दूसरी तरफ शरीर और मन पर  ध्यान के प्रभावों को लेकर वैज्ञानिक शोध बड़े पैमाने पर किए जा रहे हैं। प्राय: हर सप्ताह एक न एक रिपोर्ट सार्वजनिक हो रही है। सबका सार यही है कि ध्यान मन के प्रबंधन का बड़ा औजार है। यह स्थिति लोगों को ध्यान के लिए प्रेरित कर रही है। जाहिर है कि इस ट्रेंड को देखते हुए योग के कारोबारियों का ज्यादा फोकस ध्यान पर ही है। पर इसके साथ ही बड़ा सैद्धांतिक सवाल भी खड़ा हो गया है। वह यह कि ध्यान सीखा या…

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सर्दी का मौसम खासतौर से उच्च रक्तचाप, हृदय रोगियों और गठिया के मरीजों के लिए कई चुनौतियां प्रस्तुत करता है। इसलिए कि सामान्य शारीरिक गतिविधियां थम-सी जाती हैं और ठंड से बचकर रहना बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में योग खासतौर से योग की एक विधि नाड़ी शोधन प्राणायाम बड़े कमाल का परिणाम देता है। इस प्राणायाम में इतनी शक्ति है कि जीवन में चार चांद लगा दे।हृदयाघात की घटनाओं में वृद्धि की तात्कालिक वजह चाहे जो भी हो, पर यह सर्वामान्य है कि विभिन्न परेशानियों में उलझा हुआ मन और असंयमित जीवन-शैली से ज्यादा नुकसान हो रहा है। कहा…

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श्रीमद्भगवत गीता यानी भगवान् श्रीकृष्ण के मुखारविन्द से निकली हुई दिव्य वाणी। आगामी 11 दिसंबर को इस संजीवनी विद्या के प्रकटीकरण के 5162 साल पूरे हो जाएंगे। उसी दिन भारत सहित विश्व के अनेक देशों में गीता जयंती मनाई जाएगी। सनातन धर्म के अनुयायी पूरे उत्साह से गीता जयंती की तैयारियों में जुटे हुए हैं। इंग्लैंड से लेकर मारीशस तक और अमेरिका से लेकर कनाडा तक में गीता महोत्सव मनाया जाना है। दुनिया भर के इस्कॉन मंदिरों में गीता जयंती की व्यापक तैयारियां हैं। पर हरियाणा के कुरूक्षेत्र, जहां युद्ध के मैदान में कृष्ण द्वारा स्वयं अर्जुन को ‘भगवदगीता’ प्रकट…

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भारतीय संत कहते रहे हैं कि किसी की चेतना परिष्कृत है तो वह अतीन्द्रिय सामर्थ्य का धनी हो सकता है। एंड्रिया ड्राब्स नामक वैज्ञानिक ने न्यूट्रिनो के आधार पर ही साइकॉन अणु का पता लगाया और कहा कि साइकॉन ही मस्तिष्क के न्यूरॉन्स से जुड़कर पराचेतना को जागृत करता है। एक्सेल फरसॉफ नामक अंतरिक्ष वैज्ञानिक ने तो तथ्यों और प्रयोगों के आधार पर यह प्रमाणित कर दिया था कि मनुष्य को अनायास ही जो विचित्र अनुभूतियां होती हैं, उनमें से कुछ खास तरह की अनुभूतियां माइण्डॉन कणों के हलचल में आने से होती है। जब ये कण सक्रिय होते हैं तो…

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हम जानते हैं कि शरीर के ऊर्जा संस्थानों में असंतुलन होना योग के दृष्टिकोण से अस्वस्थ होने का मुख्य कारण होता है। कोई व्यक्ति कितना ही बुद्धिमान् या व्यवस्थित हो, यदि उसके ऊर्जा संस्थान सामान्य ढंग से क्रियाशील नहीं हैं, तो उसे व्याधिग्रस्त होना ही है। सूर्य नमस्कार योग में इतनी शक्ति है कि शारीरिक व मानसिक ऊर्जाओं में पुनर्संतुलन स्थापित हो जाता है। हाल ही छठ पूजा के दौरान दुनिया भर में करोड़ो लोगों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ सूर्यदेव की आराधना की। आमतौर पर हम सबकी यही कामना होती है कि स्वजनों को लंबी उम्र और स्वस्थ…

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चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व छठ कल यानी पांच नवंबर को नहाय-खाय के साथ प्रारंभ हो जाएगा। पर, शारदा सिन्हा के सुमधुर छठ गीतों से बीते कई दिनों से पूरा वातावरण गूंजायमान है। ये वही शारदा सिन्हा हैं, जो कोई चार-पांच दशकों से छठ व्रतियों के दिलों पर राज कर रही हैं और जिन्हें पद्मश्री से लेकर पद्मभूषण तक का सम्मान मिल चुका है। हाल के वर्षों में अनेक गायकों ने छठ पूजा के गीत गाए और उनके एलबम जारी किए गए। पर, शारदा सिन्हा के गीतों के बिना बात बनती नहीं। सब कुछ सूना-सूना लगता है। यह कहना…

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दीपावली के दिन आमतौर पर हम सब क्या करते हैं? आसुरी शक्तियों का नाश और प्रभु श्रीराम के अयोध्या आगमन पर दीपोत्सव की चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हैं। खुद के आध्यात्मिक उत्थान के लिए बृहदारण्यक उपनिषद के मंत्र “ॐ असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर् गमय, मृत्योर् मा अमृतं गमय….” की व्यावहारिक साधना करते हैं और सुख-समृद्धि के लिए लक्ष्मी जी का पूजन करते हैं। कभी कामनाएं फलीभूत होती हैं और कभी नहीं। वैदिक ज्ञान से ज्ञात होता है कि आत्मा अमर है, शरीर नश्वर है और आत्मा का ज्ञान ही अज्ञान से मुक्ति है। अंधकार का…

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बीसवीं सदी के प्रारंभ में योग और विज्ञान का समन्वय करके योग को जनोपयोगी रुप में प्रस्तुत करने वाले स्वामी कुवल्यानंद द्वारा स्थापित कैवल्यधाम, लोनावाला के शताब्दी वर्ष के मौके पर यूं तो अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। पर, “योग – सांस्कृतिक समन्वयन का एक साधन और उसका आध्यात्मिक पक्ष” विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में सांस्कृतिक सद्भाव और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देने में योग की महती भूमिकाओं पर योगियों और संतों के सारगर्भित व्याख्यान लंबे समय तक याद किए जाएंगे।वैसे तो दो दिनों के सम्मेलन में परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, अहिंसा विश्व…

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