Author: Kumar Krishnan

भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान देवताओं से भी श्रेष्ठ माना गया है। उपनिषदों से लेकर संत परंपरा तक गुरु को वह प्रकाशस्तंभ बताया गया है, जो मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के आलोक की ओर ले जाता है। इसलिए गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और आत्मपरिवर्तन का महापर्व है। यह दिन गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने, आत्मचिंतन करने और जीवन को नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।इसी सनातन परंपरा की सजीव अनुभूति इस वर्ष बिहार के ऐतिहासिक नगर मुंगेर स्थित बिहार स्कूल ऑफ योग से…

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