Author: Kishore Kumar

Spiritual journalist & Founding Editor of Ushakaal.com

महर्षि उद्दालक आरुणि का पुत्र श्वेतकेतु चौबीस वर्ष तक गुरु-गृह में रह कर चारों वेदों का पूर्ण अध्ययन करके घर लौटा, तो उसने मन ही मन विचार किया कि मैं वेद का पूर्ण ज्ञाता हूँ, मेरे समान कोई पंडित नहीं है, मैं सर्वोपरि विद्वान और बुद्धिमान हूँ। इस प्रकार के विचारों से उसके मन में गर्व उत्पन्न हो गया और वह उद्धत एवं विनय रहित होकर बिना प्रणाम किये ही पिता के सामने आकर बैठ गया। आरुणि ऋषि उसका नम्रता रहित उद्धत आचरण देख कर जान गये कि इसको वेद के अध्ययन से बड़ा गर्व हो गया है। तो भी…

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गोरखनाथ या गोरक्षनाथ जी महाराज प्रथम शताब्दी के पूर्व नाथ योगी के थे ( प्रमाण है राजा विक्रमादित्य के द्वारा बनाया गया पञ्चाङ्ग जिन्होंने विक्रम संवत की शुरुआत प्रथम शताब्दी से की थी जब कि गुरु गोरक्ष नाथ जी राजा भर्तृहरि एवं इनके छोटे भाई राजा विक्रमादित्य के समय मे थे ) [1][2] गुरु गोरखनाथ जी ने पूरे भारत का भ्रमण किया और अनेकों ग्रन्थों की रचना की। गोरखनाथ जी का मन्दिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर नगर में स्थित है।[3] गोरखनाथ के नाम पर इस जिले का नाम गोरखपुर पड़ा है। गोरखनाथ के शिष्य बाबा भैरौंनाथ जी थे जिनका वध…

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किशोर कुमार // योग इतना प्रभावी क्यों है? दरअसल, भौतिक शरीर में दो महान शक्तियां हैं – पिंगला सूर्य शक्ति और इडा चन्द्र शक्ति। ये दोनों शक्तियाँ प्रकृति प्रदत्त हैं और इन्हीं के माध्यम से समस्त शारीरिक और मानसिक कार्य सम्पादित होते हैं। जब ये दोनों शक्तियाँ असंतुलित और अस्त-व्यस्त हो जाती हैं, तब हमारे शरीर, मन, एवं संवेग में और अन्यत्र भी समस्याएँ पैदा होती हैं। योग विधियां इसी असंतुलन को दूर करने के लिए हैं। मानवता के लिए योग और स्वंय एवं समाज के लिए योग, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवसों के ये दोनों ही थीम थोड़े से अंतर के…

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बीसवीं सदी के प्रारंभ में योग विधियों पर शोध करके यौगिक चिकित्सा का अलख जगाने वाले स्वामी कुवलयानंद के गुजरे पांच दशक से ज्यादा बीत चुके हैं। पर उनकी ज्ञान-गंगा का प्रवाह अनवरत जारी है। उन्होंने जब योग-मार्ग पर यात्रा शुरू की थी तो योग साधु-संतों तक ही सीमित था और गृहस्थों के बीच उसको लेकर नाना प्रकार की भ्रांतियां थीं। उन्होंने जब आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर साबित कर दिया कि यह विश्वसनीय विज्ञान है तो देश-विदेश के लोग बरबस ही उस ओर आकृष्ट हुए। एक तरफ महात्मा गांधी ने उनकी योग विद्या का लाभ लिया तो दूसरी तरफ…

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गीता सुपरसाइट यानी इंटरनेट पर भारतीय दार्शनिक ग्रंथों का भंडार। इस तरह के कार्य टुकड़ों में तो संगठनों या व्यक्तियों किया है। पर किसी एक प्लेटफार्म पर इतना व्यापक कार्य कही नहीं है। आईआईटी, कानपुर की वजह से यह कार्य संभव हो सका है। वेबसाइट लिंक इस प्रकार है – https://www.gitasupersite.iitk.ac.in/, जिस पर वेद हो या उपनिषद, ब्रह्मसूत्र हो या योगसूत्र, महाभारत हो या रामायण प्राय: सभी वैदिक ग्रंथ अंग्रेजी सहित ग्यारह भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराए गए हैं। सभी मूल ग्रंथ संस्कृत भाषा में हैं। वेबसाइट इस तरह तैयार किया गया है कि दो ग्रंथों का तुलनात्मक अध्ययन एक…

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किशोर कुमार // महर्षि महेश योगी ज्योतिर्मठ के शंकाराचार्य रहे ब्रह्मलीन ब्रह्मानंद सरस्वती के शिष्य थे। हिमालय की गोद में कठिन साधना और अपने गुरू की ऊर्जा का असर ऐसा हुआ कि महेश प्रसाद वर्मा महर्षि महेश योगी बन गए थे। ब्रह्मानंद सरस्वती ने जब तय किया कि वे शंकराचार्य नहीं रहेंगे तो उनके सामने विकल्प था कि वे महर्षि योगी को शंकराचार्य बना सकते थे। पर उन्होंने ऐसा न करके उन्हें आशीर्वाद दिया दिया था – “तुम्हारी ख्याति दुनिया भर में होगी।“ कालांतर में ऐसा ही हुआ भी। शंकराचार्य के पद पर रहते हुए शायद यह संभव न था।…

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रासलीला, श्रीकृष्ण की बांसुरी, उसकी सुमधुर धुन और गोपियां…. इस प्रसंग में बीती शताब्दी के महानतम संत परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती की व्याख्या एक नई दृष्टि प्रदान करती है। यह शास्त्रसम्मत है, विज्ञानसम्मत भी है। जन्माष्टमी के मौके पर विशेष तौर से ज्ञान मार्ग के लोगों के लिए एक प्रेरक कथा। परमगुरू और कोई सौ से ज्यादा देशों में विशाल वृक्ष का रूप धारण कर चुकी बिहार योग पद्धति के जन्मदाता परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती के श्रीमुख से सत्संग के दौरान अनेक भक्तों ने यह कथा सुनी होगी। फिर भी यह सर्वकालिक है। प्रासंगिक है।  श्रीकृष्ण को अपनी बांसुरी से…

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किशोर कुमार  भौतिक विज्ञानियों को भी भा रहा है गीता का ज्ञान। वजह स्थापित मान्यताएं नहीं, बल्कि वैज्ञानिक शोधों के परिणाम हैं। विश्वव्यापी कोरोना संकट के कारण व्याप्त विषाद और अवसाद से पार जाने के उपाय गीता के ज्ञान से ही मिलते दिख रहे हैं। बीती सदी के महानतम संत स्वामी सत्यानंद सरस्वती भी कहा करते थे कि चिंतन करने से विषाद दूर नहीं होगा। इसलिए कि जो आदमी अंधा है, उसे कितना ही अच्छा चश्मा दे दो, वह देख नहीं सकता। पर गीता में वह शक्ति है कि उससे प्रेरणा लेने वाला तमाम विपरीत परिस्थितियों से जूझ सकता है…

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किशोर कुमार // भारत के योगियों औऱ संत-महात्माओं ने श्रीराम की शिक्षाओं को दो अलग-अलग संदर्भों में देखा है। एक है भक्ति मार्ग और दूसरा है भक्ति योग। भारतीय चिंतन परंपरा में इसकी स्पष्ट व्याख्या की गई है। श्रीमद्भागवत के मुताबिक भक्ति मार्ग नवधा भक्ति है। इसके मुताबिक श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन और वंदन ये छह विधियां हैं, जिनके द्वारा व्यक्ति दिव्यता के स्रोत से जुड़ पाता है। अपने अराध्य के साथ आंतरिक संबंध विकसति करता है। इसका अनुभव सातवें और आठवें चरण में होता है और नवें चरण में पूर्ण आत्म-समर्पण सिद्ध होता है। भक्ति योग इससे बिल्कुल…

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मध्यप्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में एक विषय के तौर पर योग भी होगा। कोविड-19 से संक्रमित मुख्यमंत्री चौहान ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए खुद ही यह घोषणा की है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए प्रत्येक स्कूल में एक-एक योग प्रशिक्षक की नियुक्ति की जाएगी। मुख्यमंत्री के मुताबिक नई शिक्षा नीति के अंतर्गत स्कूली पाठ्यक्रम में योग शिक्षा के साथ ही नैतिक शिक्षा को भी विशेष महत्व दिया जाए। इसके साथ ही संगीत, दर्शन, कला, नृत्य आदि विषय भी पाठ्यक्रम के हिस्सा होंगे। शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के मुताबिक प्रदेश में इस प्रकार के 10,000 स्कूल विकसित किए…

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