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Author: Dr. Rajeev Kumar
आध्यात्मिक उत्क्रांति (Spiritual Emergency): अंतराग्नि का आंतरिक प्रवाह – 4
आध्यात्मिक संकट (Spiritual Emergency/ आध्यात्मिक उत्क्रांति) की प्रकारिकी: मनोविकृति या आत्मिक रूपांतरण?आध्यात्मिक संकट केवल मानसिक असंतुलन की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि यह आत्मिक रूपांतरण की संभावना भी समेटे हुए है—जहाँ व्यक्ति अपने भीतर की गहराइयों से जुड़कर चेतना के नए आयामों को छूता है।सिगमंड फ्रायड ने मानसिक असंतुलन को “इड, ईगो और सुपरईगो” के बीच बिगड़े संतुलन का परिणाम माना। उनके अनुसार, जब यह संतुलन टूटता है, तो व्यक्ति क्रोध, भय, दमन, बाध्यता और जुनून जैसे लक्षणों से ग्रस्त हो जाता है। परंतु नियो-फ्रायडियन विचारकों ने इस संकट को एक गहन आध्यात्मिक आयाम दिया, जिसे उन्होंने “Spiritual Emergency/ आध्यात्मिक उत्क्रांति”…
आध्यात्मिक उत्क्रांति (Spiritual Emergency): अंतराग्नि का आंतरिक प्रवाह – 3
पिछले भाग में हमने देखा कि कुंडलिनी ऊर्जा चक्रों और मस्तिष्कीय केंद्रों के माध्यम से साधक को आत्मिक विकास की ओर ले जाती है। अब इस भाग में हम इसके मनो-शारीरिक प्रभावों और अनुभवजन्य परिणामों को समझेंगे, जो साधक के जीवन को गहराई से बदल देते हैं।कुंडलिनी जागरण के प्रभावकुंडलिनी जागरण साधक के जीवन में बहुस्तरीय परिवर्तन लाता है—शारीरिक संवेदनाओं से लेकर मानसिक, आध्यात्मिक और ऊर्जा स्तर तक, यह अनुभव व्यक्ति को उसकी सीमित पहचान से बाहर निकालकर व्यापक चेतना की ओर ले जाता है।शारीरिक स्तर पर अनुभवकुंडलिनी शक्ति के जागरण की प्रक्रिया प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न होती है, परंतु कुछ…
आध्यात्मिक उत्क्रांति (Spiritual Emergency): अंतराग्नि का आंतरिक प्रवाह – 2
कुंडलिनी क्या है: ऊर्जा का सुप्त स्रोतकुंडलिनी ऊर्जा भारतीय योग परंपरा का सबसे रहस्यमयी आयाम है, जो मेरुदंड के मूल में सुप्त अवस्था में स्थित रहती है और साधक के भीतर गहन रूपांतरण की संभावना जगाती है।भारतीय योग परंपरा में “कुंडलिनी” शब्द एक रहस्यमयी और शक्तिशाली ऊर्जा का प्रतीक है। इसका प्रारंभिक उल्लेख हठयोग प्रदीपिका जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है, जहाँ इसे “मुक्ति की कुंजी” कहा गया है—एक सर्प के समान कुंडलित, जो मेरुदंड के मूल में सुप्त अवस्था में स्थित रहती है। स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने इसे आत्म-जागरण की प्रक्रिया का मूल आधार माना है, जो साधक को…
आध्यात्मिक उत्क्रांति (Spiritual Emergency): अंतराग्नि का आंतरिक प्रवाह
मनुष्य का जीवन केवल जैविक अस्तित्व तक सीमित नहीं है; उसके भीतर आत्मा की पुकार है जो उसे आत्म-साक्षात्कार और गहन रूपांतरण की ओर ले जाती है। यही पुकार कभी संकट जैसी प्रतीत होती है, पर वास्तव में यह आध्यात्मिक उत्क्रांति का द्वार है।मनुष्य केवल जैविक अस्तित्व नहीं है, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक सत्ता भी है। यह विचार मनोविज्ञान के अग्रणी चिंतक अब्राहम मैस्लो द्वारा प्रतिपादित किया गया था, जिन्होंने आत्म-साक्षात्कार को मानव विकास की सर्वोच्च आवश्यकता माना। उनके अनुसार, आध्यात्मिक विकास की आकांक्षा मानव स्वभाव में अंतर्निहित होती है और यही उसे पूर्णता की ओर ले जाती है। विभिन्न…
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